Monday, May 4, 2026

Papaji's Poem-4 


दर्द

कितना है दर्द

सीने में ,

ऑंसू क्यों उमड़े

आँख में।

 

ठिकाना बदल लिया

ऑंसू और

हॅंसी के ठहाके कान में

ऑंसू  आँख में

 

 जीवन क्या है

एक सफर

कुछ दूर आना और जाना है

कभी ठिकाना कभी से ठिकाना है।

यहां कोई अपना कोई बेगाना है

हमें कोई रोना और कोई गाना है 

दोस्तों बस चलने हमें भी निभाना है

आज मस्ती भरे बोल सुनना सुनना है।

 

गोवा में

 

अब लोगों को

उम्र बात बताने पर

लग जाती नजर !

 

आज तक

ठग,  बेईमानधोखेबाज रहा

अचानक

बन गया रक्षक।

 

कहो , एक-एक

फोन सबके आए

बदल गई

आवाज !

 

बरसों बीत गए

वादे सुनते - सुनते

और भी

अभी वक्त बाकी है !

 

तुमने साथ तो दे दिया

पर और बहुत कुछ

रह गया

अनदिया  

-------------


No comments:

Post a Comment