Monday, April 20, 2026

 Purana Tradition: Speakers and Listeners

Puranas are interpretations of the Vedas. Just as there are examples and repetitions in the explanation of sutras, similarly there are examples and repetitions of Vedic theory-sutras etc. in the Puranas.

S. No.

Purana Name

Speaker

Listener (Shrota)

1

Brahma Purana

Brahma

Marichi

2

Padma Purana

Brahma (self-manifest in Hiranmaya Padma)

Brahma

3

Vishnu Purana

Vishnu

Parāśara

4

Shiva Purana / Airava

Shiva

Airava

5

Linga Purana

Maheshwara (Shiva)

Not specified

6

Garuda Purana

Sri Hari Vishnu

Garuda

7

Narada Purana

Sanaka and other sages

Narada

8

Bhagavata Purana

Lord Vishnu

Brahma

Devi Bhagavata

Brahma

Not specified

9

Agni Purana

Agni (Fire Deity)

Vashistha

10

Skanda Purana

Vyasadeva

Not specified

11

Bhavishya Purana

Brahma

Manu

12

Brahma Vaivarta Purana

Savarni

Narada

13

Markandeya Purana

Markandeya

Jaimini

14

Vamana Purana

Brahma / Pulastya

Pulastya / Narada

15

Varaha Purana

Lord Vishnu (Varaha Avatar)

Prithvi (Earth)

16

Matsya Purana

Matsya (Vishnu Avatar)

Not specified

17

Kurma Purana

Kurma (Vishnu Avatar)

Not specified

18

Brahmanda Purana

Brahma

Not specified

 


 Amazing Tulasi Das

रघुपतिभक्ति करत कठिनाई।
कहत सुगम करनी अपारजानै सोई जेहि बनि आई॥
जो जेहिं कला कुसलता कहँसोई सुलभ सदा सुखकारी॥
सफरी सनमुख जल प्रवाहसुरसरी बहै गज भारी॥
ज्यो सर्करा मिले सिकता महँबल तैं  कोउ बिलगावै॥
अति रसज्ञ सूच्छम पिपीलिकाबिनु प्रयास ही पावै॥
सकल दृश्य निज उदर मेलिसोवै निन्द्रा तजि जोगी॥
सोई हरिपद अनुभवै परम सुखअतिसय द्रवैत बियोगी॥
सोकमोहभयहरषदिवसनिसिदेस काल तहँ नाहीं॥
तुलसीदास यहि दसाहीनसंसय निर्मूल  जाहीं

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कवित विवेक एक नहिं मोरे, सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।
कबि होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ॥
कबि होउँ नहिं बचन प्रबीनू सकल कला सब बिद्या हीनू


 

Shayaris_ Internet _4

ये क्या उठाये कदम और गयी मंजिल।

मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे।।

ये कह कर मुझे मेरे दुश्मन हँसता छोड़ गए,
तेरे दोस्त काफी हैं तुझे रुलाने के लिए।

कुछ लोग जिंदगी होते हैं,
पर जिंदगी में नहीं होते।
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वो मुझ से बिछड़ कर अब तक रोया नहीं फराज़
कोई तो है हमदर्द जो उसे रोने नहीं देता

 
नहीं आती तो याद उनकी महीनों भर नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं 

आयेगा लिखते लिखते ही लिखने का फ़न उन्हें
बच्चे खराब करते हैं कुछ कापियां ज़रूर

उस पार अब तो कोई तेरा मुन्तज़िर नहीं
कच्चे घड़े पर तैर कर जाना फिज़ूल है

वो मेरा सब कुछ था, बस मुकद्दर नहीं फराज़
काश वो मेरा कुछ नहीं बस मुकद्दर होता

जा की आखिरी हिचकी को ज़रा गौर से सुन
ज़िन्दगी भर का खुलासा इसी आवाज़ में है

 
उसका किरदार परख लेना यकीन से पहले
मेरे बारे में जो तुमसे बुरा कहता होगा

अब उसे रोज़ सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़
इक उम्र हो गयी उसकी याद नशा करते करते

मेरे बगैर कैसे गुज़री होगी उसकी कल की रात
उसकी आंख का फैला काजल सारी कहानी सुनाता है

वो बता रहा था बहुत दूर का सफर
ज़ंजीर खींच कर जो मुसाफिर उतर गया

ये धुंआ कम हो, तो पहचान मुमकिन हो शायद
यूँ तो वो जलता हुआ अपना ही घर लगता है

मैं ये समझा था, कि खत्म मेरी दास्तां हुई
वो बिछड़ कर और भी लम्बी कहानी कर गया

खुद को चुनते हुए दिन सारा गुज़र जाता है फ़राज़
फ़िर हवा शाम की चलती है तो बिखर जाते हैं

 
मोहब्बत तो वो पहली ही मोहब्बत थी फराज़
इसके बाद तो हर शक्स में ढूँढा उस को

सूखी शाखों पर तो हमने लहू छिड़का था फ़राज़
कलियां अब भी खिलती तो कयामत होती

 
मोहब्बत की परस्तिश के लिये एक रात ही काफी है फराज़
सुबह तक जो ज़िन्दा रह जाये वो परवाना नहीं होता

उसका मिलना ही मुक्कद्दर में था फ़राज़
वरना क्या कुछ नहीं खोया हमने उसे पाने के लिये

कुछ इसलिये भी तुम से मोहब्बत है फ़राज़
मेरा तो कोई नहीं है तुम्हारा तो कोई हो

ज़िन्दगी तो अपने ही कदमों पे चलती है फ़राज़
ग़ैरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं

जो भी बिछड़े हैं कब मिले हैं फ़राज़
फ़िर भी तू इंतज़ार कर शायद !!
......

जिंदगी में अगर रिश्ते कायम रखने हैं तो झुक जाओ।
और अगर बार बार आपको झुकना पड़े तो रुक जाओ।

जिंदगी को मैंने कुछ ऐसे आसान कर दिया
कभी किसी से माफी मांग ली
तो कभी किसी को माफ कर दिया।
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जान दे सकता है क्या साथ निभाने के लिए
हौसला है तो बढ़ा हाथ मिलाने के लिए

ज़ख्मे-दिल इस लिए चेहरे पे सजा रखा है
कुछ तमाशा तो हो दुनिया को दिखाने के लिए

मैंने दीवार पे क्या लिख दिया खुद को इक दिन
बारिशें होने लगी मुझको मिटाने के लिए

इक झलक देख लें तुझको तो चले जाएंगें
कौन आया है यहां उम्र बिताने के लिए

फ़िल्म के परदे पे छपना कोई आसान नहीं
मरना पड़ता है यहाँ नाम कमाने के लिए
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ज्यों शर्करा मिले सिकता मा
सूक्ष्म पिपिलका बिनु प्रयास ही पावे
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बस यही दो मसले, जिंदगी भर ना हल हुए!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!
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मुस्कुराते तो वो भी हैं, और मुस्कुराते हम भी
हमें तो सितम याद आते हैं, जाने उन्हें कौन?

दहेज़ में बहू क्या लायी, यह सबने हरवक़्त पूछा
पर बेटी क्या छोड़ आई, अब तक किसी ने ना सोचा
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चलो साथ चलते हैं समंदर के किनारों तक ,
किनारे पर ही देखेंगे किनारा कौन करता है।
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खामोशी सताती बहुत, कुछ झूठ तसल्ली को कह दो
मुस्कराते कहा उसने, हमें याद बहुत आते हो।
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ना जाने किस मिट्टी को, ख्वाइश मेरे वजूद की  रही….
उतना तो मैं बना भी था, जितना मिटा दिया गया

नफ़रत हो जायेगी तुझे, अपने ही किरदार पर
गर मैं तेरे ही अंदाज में, तुझसे बातें करुं
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जिस आईने में आए सनम तू नजर मुझे
वो आईना दिखाया दे सनम तू नजर मुझे

जब ना होश था हैं को दुश्मनी से डरते थे
अब जो होश आया है दोस्ती से डराते हैं।

अपनी शख्शियत की मिसाल क्या दूँ तुम्हें यारों...
ना जाने कितने मशहूर हो गये हमें बदनाम करते करते।

क्यों ना बेफिक्र होकर सोया जाए
अब बचा ही क्या है जिसे खोया जाए
अहमद फ़राज़ के बेस्ट 20 शेर

1.
ग़म--दुनिया भी ग़म--यार में शामिल कर लो
नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें

2.
कुछ तो मिरे पिंदार--मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए

3.
डूबते डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ
मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा

4.
जुदाइयाँ तो मुक़द्दर हैं फिर भी जान--सफ़र
कुछ और दूर ज़रा साथ चल के देखते हैं

5.
इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब
इतना याद कि तुझे भूल जाएँ हम

6.
ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे

7.
यूँही मौसम की अदा देख के याद आया है
किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ

8.
कितना आसाँ था तिरे हिज्र में मरना जानाँ
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते

9.
ये ख़्वाब है ख़ुशबू है कि झोंका है कि पल है
ये धुँद है बादल है कि साया है कि तुम हो

10.
जब भी दिल खोल के रोए होंगे
लोग आराम से सोए होंगे

11.
ये कौन फिर से उन्हीं रास्तों में छोड़ गया
अभी अभी तो अज़ाब--सफ़र से निकला था

12.
तेरी बातें ही सुनाने आए
दोस्त भी दिल ही दुखाने आए

13.
कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता
बूँदा-बाँदी भी धूप भी है अभी

14.
ख़ुश हो दिल कि मोहब्बत तो निभा दी तू ने
लोग उजड़ जाते हैं अंजाम से पहले पहले

15.
हम कि दुख ओढ़ के ख़ल्वत में पड़े रहते हैं
हम ने बाज़ार में ज़ख़्मों की नुमाइश नहीं की

16.
यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
ज़िंदगी हम तिरे हाथों से मारे जाएँ

17.
जिन के हम मुंतज़िर रहे उन को
मिल गए और हम-सफ़र शायद

18.
लोग हर बात का अफ़्साना बना देते हैं
ये तो दुनिया है मिरी जाँ कई दुश्मन कई दोस्त

19.
किसे ख़बर वो मोहब्बत थी या रक़ाबत थी
बहुत से लोग तुझे देख कर हमारे हुए

20.
क्या लोग थे कि जान से बढ़ कर अज़ीज़ थे
अब दिल से महव नाम भी अक्सर के हो गए

मशहूर शायर वसीम बरेलवी के 20 बड़े शेर

1.
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

2.
मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा

3.
झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए
और मैं था कि सच बोलता रह गया

4.
उस ने मेरी राह देखी और वो रिश्ता तोड़ लिया
जिस रिश्ते की ख़ातिर मुझ से दुनिया ने मुँह मोड़ लिया

5.
उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले
मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले

6.
क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर--दर मैं ने किया
उम्र-भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

7.
दिल की बिगड़ी हुई आदत से ये उम्मीद थी
भूल जाएगा ये इक दिन तिरा याद आना भी

8.
एक मंज़र पे ठहरने नहीं देती फ़ितरत
उम्र भर आँख की क़िस्मत में सफ़र लगता है

9.
चाहे जितना भी बिगड़ जाए ज़माने का चलन
झूट से हारते देखा नहीं सच्चाई को

10.
तुम साथ नहीं हो तो कुछ अच्छा नहीं लगता
इस शहर में क्या है जो अधूरा नहीं लगता

11.
मोहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
ये रूठ जाएँ तो फिर लौट कर नहीं आते

12.
जो मुझ में तुझ में चला रहा है सदियों से
कहीं हयात उसी फ़ासले का नाम हो

13.
दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता
तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता

14.
निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते
यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते

15.
जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा
किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता

16.
वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता
मगर इन एहतियातों से तअल्लुक़ मर नहीं जाता

17.
हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें
ज़लज़लों के ख़ौफ़ से क्या घर बनाना छोड़ दें

18.
हम अपने आप को इक मसअला बना सके
इसलिए तो किसी की नज़र में सके

19.
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

20.
ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं
तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी

गुलज़ार की टॉप 20 शायरी

1.आप के बा' हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

2.ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

3.शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

4.कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

5.वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है

6.कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

7.आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने 'तिबार किया

8.जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है

9.हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

10. हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया

11.तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं

12.ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में

13.जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है

14.अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है

15.दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई

16.चंद उम्मीदें निचोड़ी थीं तो आहें टपकीं
दिल को पिघलाएँ तो हो सकता है साँसें निकलें

17.देर से गूँजते हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई

18.रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले
क़रार दे के तिरे दर से बे-क़रार चले

19.ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता

20.भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में
उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं

राज कैसे पहुंच गए गैरों तक,
मशवरे तो हमने अपनों से किए थे।
++++++++++
कवित विवेक एक नहिं मोरे, सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।
कबि होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ॥
कबि होउँ नहिं बचन प्रबीनू सकल कला सब बिद्या हीनू

आंखों में पानी लिए मुझे घूरता ही रहा
आईने में खड़ा वो शख्स कितना उदास था। 

उम्र गुजरी है मांजते हैं खुद को
साफ हैं पर, चमक नहीं पाए।

किया बादलों में सफ़र, ज़िन्दगी भर
ज़मीं पर बनाया ना घर, ज़िन्दगी भर
मोहब्बत रही चार दिन ज़िन्दगी में
रहा चार दिन का असर, ज़िन्दगी भर
- Anwar Shaoor

मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा
हौसला हार के बैठूँगा तो मर जाऊँगा
चल रहे थे जो मेरे साथ कहाँ हैं वो लोग
जो ये कहते थे कि रस्ते में बिखर जाऊँगा
Saki Amrohi

जहाँ तक मुझसे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझको पूछा जा रहा है
ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
- Naeem Akhtar Khadimi

हमारा मसला यह है मजाक किससे करें
पुराना दोस्त तो अब एहतराम मांगता है।

जो दुकान हमने दान कर दी थी
अब उसी से उधार लेते हैं

किस तरफ को चलती है अब हवा नहीं मालूम
हाथ उठा लिए सबने पर दुआ नहीं मालूम।

दूरी हुई तो उनसे करीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
- Waseem Barelvi

जिसको हर वक्त देखता हूं मैं
उसको बस एक बार देखा है।

तुझे प्यार करना नहीं आता मुझे प्यार के सिवा कुछ नहीं आता,
दो तरीके हैं दुनिया में जीने के, एक तुझे नहीं आता एक मुझे नहीं आता।

कुछ देर की खामोशी है, फिर शोर आयेगा
तुम्हारा सिर्फ़ वक्त आया है, हमारा दौर आयेगा!

कुछ कुछ बोलते रहो हमसे
चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे