Shayaris
रिश्ते
है इसलिए चुप है
चुप है इसलिए रिश्ते
है।।
सर पर चढ़कर बोल
रहे हैं, पौधे जैसे
लोग,
पेड़ बने खामोश खड़े
हैं, कैसे-कैसे लोग....
प्यार
एक नशा है
जिसका पहले उतर गया
वो बेवफा है।।
Shayaris
रिश्ते
है इसलिए चुप है
चुप है इसलिए रिश्ते
है।।
सर पर चढ़कर बोल
रहे हैं, पौधे जैसे
लोग,
पेड़ बने खामोश खड़े
हैं, कैसे-कैसे लोग....
प्यार
एक नशा है
जिसका पहले उतर गया
वो बेवफा है।।
Papaji's Poems -1
बहरी
खुशबू
किस-किस को दें
भीख
यहां
तो हर एक
लखपति
नजर आता।
यारों
अब किस-किस को
दें
सीख
हर कोई तो पी
एचडी नजर आता।
अपनी
जेब में रखो
दस पैसे, चवन्नी
अठन्नी
तक,
नहीं
चलती, आज के बाजार
में।
रुपल्ली दो
रुपल्ली भी,
भरी
है लोगों की जेब में।
पांच
सौ
हजार
तक की गड्डी, से
अंधे हो
क्या
नजर नहीं आता ?
ले जाओ -
अपने
साथ
सारा
कुछ अनुभव
सबके
लिए मानक है
अपनी
बात,
बहरे
हो, सुनाई नहीं देता ।
-------------
चिड़िया
वह
कितनी
छोटी-छोटी चिड़िया
चुगती
दाना और
फुदकती,
मटकती
और फुर्र से
पहुंचती
उस टहनी पर।
और आज अठखेलियों का
करती
नन्ही
गौरैया
कैसे
चहक रही
बहक
रही
और मुझे
स्तब्ध
कर रही।
सूरज
की पहली किरण संग
नन्ही
चोंच से
देखो
- देखो
कैसे
वह लड़ रही !
थकती
नहीं
दाना
चुग
फिर
पानी
बूंद
भर रही।
कैसी
अल्हड़ यह
हवा
को
उड़ते
- उड़ते पूँछ से
पीछे
छोड़ आगे बढ़ रही।
कुछ
अकेली
कुछ
जोड़े में
और सैकड़ो झुंड में
उड़
रही, उड़ रह।
कहां,
क्यों, कब ?
प्रश्न
कोई भी हो
अवांतर
है लगता है उन्हें
बस उड़ रही,
उड़ना
है,
वे सब उड़ रही।
-----------
चिराग
इन चिरागों ने
जलना
है सीखा अभी,
आप आंचल में रख
कर इन्हें
कुछ
और नेहा तो दीजिए।
यह अमानत है मुल्क की
अंधेरा
बहुत है,
इनकी
जरूरत ज्यादा
इन्हें
रोशन होने दीजिये।
आपने ही
सींचा है इनको
अपने
खून - पसीने से
अब ये क्यारी
से बयार में
खुशबू
केसर की लीजिए।
इस वक्त दौर है
जलजला जानवरों का
इस बीहड़ में चलना
कुछ
आसान कीजिए।
इनको
लफ्ज़ दो - चार अपने
लबों से
आप ही इंसानियत का
सिखा दीजिए।
इस जमाने में चलना सीखा
इन्होंने
आपसे कुछ कदम अभी
और चलना,
कुछ
कायदे इन्हें बता दीजि।
आप ही इन कदमों
को राह दिखा दीजिये।
------------
कल तक जो
गोद
से
उतरते
ना थे
पानी
पीने तक,
अब महीने दो महीने की
दे रहे नोटिस -
आ रहे हैं
प्रोग्राम
बना रहे हैं!
कल तक
सांस
लेने या
दिल
धड़कने की तरह
आसपास
करते रहते
उछल
कूद।
अब महीने दो महीने पूर्व
तैयारियां
हो रही
उनकी
अगवानी की।
धूल,
माटी,
कहीं
पांव में ठोकर
या कहीं उंगली की
चोट
वरना
पता भी नहीं चलता
कि घर में हैं
ट्यूशन
या फिर स्कूल के
कमरे में
अब महीने दो महीने पहले
बनने
लगा
मिनट
टू मिनट
प्रोग्राम
चौदहों
का मिलक।
वैसे
ना कटे हैं
ना कहीं फटे हैं
मगर
दूर - बहुत
दूर
अब जा बसे हैं।
घर बार रोजी-रोटी
पढ़ाई
- लिखाई सब ठीक है।
---------------
Purana Tradition: Speakers and Listeners
Puranas are interpretations of the Vedas. Just as there are examples and repetitions in the explanation of sutras, similarly there are examples and repetitions of Vedic theory-sutras etc. in the Puranas.
|
S. No. |
Purana Name |
Speaker |
Listener (Shrota) |
|
1 |
Brahma Purana |
Brahma |
Marichi |
|
2 |
Padma Purana |
Brahma (self-manifest in Hiranmaya Padma) |
Brahma |
|
3 |
Vishnu Purana |
Vishnu |
Parāśara |
|
4 |
Shiva Purana / Airava |
Shiva |
Airava |
|
5 |
Linga Purana |
Maheshwara (Shiva) |
Not specified |
|
6 |
Garuda Purana |
Sri Hari Vishnu |
Garuda |
|
7 |
Narada Purana |
Sanaka and other sages |
Narada |
|
8 |
Bhagavata Purana |
Lord Vishnu |
Brahma |
|
Devi Bhagavata |
Brahma |
Not specified |
|
|
9 |
Agni Purana |
Agni (Fire Deity) |
Vashistha |
|
10 |
Skanda Purana |
Vyasadeva |
Not specified |
|
11 |
Bhavishya Purana |
Brahma |
Manu |
|
12 |
Brahma Vaivarta Purana |
Savarni |
Narada |
|
13 |
Markandeya Purana |
Markandeya |
Jaimini |
|
14 |
Vamana Purana |
Brahma / Pulastya |
Pulastya / Narada |
|
15 |
Varaha Purana |
Lord Vishnu (Varaha Avatar) |
Prithvi (Earth) |
|
16 |
Matsya Purana |
Matsya (Vishnu Avatar) |
Not specified |
|
17 |
Kurma Purana |
Kurma (Vishnu Avatar) |
Not specified |
|
18 |
Brahmanda Purana |
Brahma |
Not specified |
Amazing Tulasi Das
रघुपति! भक्ति करत कठिनाई।
कहत सुगम करनी अपार, जानै सोई जेहि बनि आई॥
जो जेहिं कला कुसलता कहँ, सोई सुलभ सदा सुखकारी॥
सफरी सनमुख जल प्रवाह, सुरसरी बहै गज भारी॥
ज्यो सर्करा मिले सिकता महँ, बल तैं न कोउ बिलगावै॥
अति रसज्ञ सूच्छम पिपीलिका, बिनु प्रयास ही पावै॥
सकल दृश्य निज उदर मेलि, सोवै निन्द्रा तजि जोगी॥
सोई हरिपद अनुभवै परम सुख, अतिसय द्रवैत बियोगी॥
सोक, मोह, भय, हरष, दिवस, निसि, देस काल तहँ नाहीं॥
तुलसीदास यहि दसाहीन, संसय निर्मूल न जाहीं
----------
कवित
विवेक एक नहिं मोरे,
सत्य कहउँ लिखि कागद
कोरे।
कबि न होउँ नहिं
चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम
गुन गावउँ॥
कबि न होउँ नहिं
बचन प्रबीनू । सकल कला
सब बिद्या हीनू ॥
Shayaris_ Internet _4
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल।
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे।।गुलज़ार
की टॉप 20 शायरी
1.आप के बा'द
हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही
गुज़ारी है
2.ज़िंदगी यूँ हुई बसर
तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र
तन्हा
3.शाम से आँख में
नमी सी है
आज फिर आप की
कमी सी है
4.कभी तो चौंक के
देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में
हम को भी इंतिज़ार
दिखे
5.वक़्त रहता नहीं कहीं
टिक कर
आदत इस की भी
आदमी सी है
6.कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ
कहने की कोशिश की
7.आदतन तुम ने कर
दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
8.जिस की आँखों में
कटी थीं सदियाँ
उस ने सदियों की
जुदाई दी है
9.हाथ छूटें भी तो रिश्ते
नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से
लम्हे नहीं तोड़ा करते
10. हम ने अक्सर तुम्हारी
राहों में
रुक कर अपना ही
इंतिज़ार किया
11.तुम्हारे ख़्वाब से हर शब
लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम
ने ख़ताएँ भेजी हैं
12.ख़ुशबू जैसे लोग मिले
अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने
में
13.जब भी ये दिल
उदास होता है
जाने कौन आस-पास
होता है
14.अपने माज़ी की जुस्तुजू में
बहार
पीले पत्ते तलाश करती है
15.दिन कुछ ऐसे गुज़ारता
है कोई
जैसे एहसाँ उतारता है कोई
16.चंद उम्मीदें निचोड़ी थीं तो आहें
टपकीं
दिल को पिघलाएँ तो
हो सकता है साँसें
निकलें
17.देर से गूँजते हैं
सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता
है कोई
18.रुके रुके से क़दम
रुक के बार बार
चले
क़रार दे के तिरे
दर से बे-क़रार
चले
19.ये शुक्र है कि मिरे
पास तेरा ग़म तो
रहा
वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला
दिया होता
20.भरे हैं रात के
रेज़े कुछ ऐसे आँखों
में
उजाला हो तो हम
आँखें झपकते रहते हैं
राज कैसे पहुंच गए
गैरों तक,
मशवरे तो हमने अपनों
से किए थे।
++++++++++
कवित विवेक एक नहिं मोरे,
सत्य कहउँ लिखि कागद
कोरे।
कबि न होउँ नहिं
चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम
गुन गावउँ॥
कबि न होउँ नहिं
बचन प्रबीनू । सकल कला
सब बिद्या हीनू ॥
आंखों में पानी लिए
मुझे घूरता ही रहा
आईने में खड़ा वो
शख्स कितना उदास था।
उम्र
गुजरी है मांजते हैं
खुद को
साफ हैं पर, चमक
नहीं पाए।
किया बादलों में सफ़र, ज़िन्दगी
भर
ज़मीं पर बनाया ना
घर, ज़िन्दगी भर
मोहब्बत रही चार दिन
ज़िन्दगी में
रहा चार दिन का
असर, ज़िन्दगी भर
- Anwar Shaoor
मंज़िलें लाख कठिन आएँ
गुज़र जाऊँगा
हौसला हार के बैठूँगा
तो मर जाऊँगा
चल रहे थे जो
मेरे साथ कहाँ हैं
वो लोग
जो ये कहते थे
कि रस्ते में बिखर जाऊँगा
Saki Amrohi
जहाँ तक मुझसे मतलब
है जहाँ को
वही तक मुझको पूछा
जा रहा है
ज़माने पर भरोसा करने
वालों
भरोसे का ज़माना जा
रहा है
- Naeem Akhtar Khadimi
हमारा मसला यह है
मजाक किससे करें
पुराना दोस्त तो अब एहतराम
मांगता है।
जो दुकान हमने दान कर
दी थी
अब उसी से उधार
लेते हैं
किस तरफ को चलती
है अब हवा नहीं
मालूम
हाथ उठा लिए सबने
पर दुआ नहीं मालूम।
दूरी हुई तो उनसे
करीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे
जो बढ़ने से कम हुए
- Waseem Barelvi
जिसको हर वक्त देखता
हूं मैं
उसको बस एक बार
देखा है।
तुझे प्यार करना नहीं आता
मुझे प्यार के सिवा कुछ
नहीं आता,
दो तरीके हैं दुनिया में
जीने के, एक तुझे
नहीं आता एक मुझे
नहीं आता।
कुछ देर की खामोशी
है, फिर शोर आयेगा
तुम्हारा सिर्फ़ वक्त आया है,
हमारा दौर आयेगा!
कुछ न कुछ बोलते
रहो हमसे
चुप रहोगे तो लोग सुन
लेंगे