Shayaris_ Internet _3
लेकिन कभी ज़मीर का सौदा नहीं किया..
दिल को जला के दी है ज़माने को रौशनी ,
जुगनू पकडके हमने उजाला नहीं किया।
बेर कैसे थे, ये शबरी से पूछो,
श्रीराम से पूछोगे तो मीठे ही कहेंगे।
ज़हर का स्वाद शिव से पूछो,
मीरा से पूछोगे तो अमृत ही कहेगी
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एक ही शख्स था जो समझता था मुझे,
फिर यूं हुआ वो भी समझदार हो गया।
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे
मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे
मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
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Na Jane Kia Mujh Se ZAMANA Chahta Hai
Mera Dil Tor K Mujhay Hansana Chahta Hai
Na Jane Kya Bat Jhalakti Hai Mera Chahre Se
Har Shakhs Mujhe AZMANA chahata hai
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कुछ लोग जिंदगी होते हैं
मगर जिंदगी में नहीं होते
दुआ करना ऐसे ही मेरा दम निकले,
जितनी आसानी से तेरे दिल से हम निकले.
सुना है तुम्हे मोहब्बत करनी नहीं आती
मगर तुम बर्बाद कमाल के करते हो।
मोहब्बत बड़ी नामुराद चीज है
जिससे होती है वो किसी और का होता है।।
बनाकर अपना कुछ लोग
फिर खूब तमाशा बनाते हैं
यू ही गिरते गिरते एक दिन संभल जायेंगे
हम बदला नही लेंगे बस बदल जायेंगे
मैं हो तो जाऊं पहले जैसा
मगर मुझे याद नहीं मैं था कैसा.
वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता
मगर इन एहतियातों से तअ'ल्लुक़ मर नहीं जाता
खुले थे शहर में सौ दर मगर इक हद के अंदर ही
कहाँ जाता अगर मैं लौट के फिर घर नहीं जाता
इंसान ना हंसकर सीखता हैं
ना रोकर सीखता हैं
या तो किसी का होकर सीखता हैं
य़ा किसी को खोकर सीखता हैं.
कौन आएगा यहाँ, कोई ना आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
धूप में जलकर जो मेरे साथ आया होगा,
वो कोई और नहीं मेरा साया होगा।
यह जो दीवार पर हैं कुछ नक्श धुंधले धुंधले
उसने मेरा नाम लिख लिख कर मिटाया होगा।
हम तो दुश्मन को भी पाकीजा सजा देते हैं,
हाथ उठाते नहीं, नजरों से गिरा देते है।
अगर दिल में रखो, तो दिल से रखो...
वर्ना दिल रखने के लिये, दिल ना रखो।
जिंदगी और भी आसान हो जाती,
अगर वक़्त से पहले लोगों की पहचान हो जाती !!
वो मतलब से मिलता था
और मुझे मिलने से मतलब था।
उम्र गुजरी है मांजते हैं खुद को
साफ हैं पर, चमक नहीं पाए।
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किया बादलों में सफ़र, ज़िन्दगी भर
ज़मीं पर बनाया ना घर, ज़िन्दगी भर
मोहब्बत रही चार दिन ज़िन्दगी में
रहा चार दिन का असर, ज़िन्दगी भर
- Anwar Shaoor
मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा
हौसला हार के बैठूँगा तो मर जाऊँगा
चल रहे थे जो मेरे साथ कहाँ हैं वो लोग
जो ये कहते थे कि रस्ते में बिखर जाऊँगा
Saki Amrohi
जहाँ तक मुझसे मतलब है जहाँ को
वही तक मुझको पूछा जा रहा है
ज़माने पर भरोसा करने वालों
भरोसे का ज़माना जा रहा है
- Naeem Akhtar Khadimi
हमारा मसला यह है मजाक किससे करें
पुराना दोस्त तो अब एहतराम मांगता है।
जो दुकान हमने दान कर दी थी
अब उसी से उधार लेते हैं
किस तरफ को चलती है अब हवा नहीं मालूम
हाथ उठा लिए सबने पर दुआ नहीं मालूम।
दूरी हुई तो उनसे करीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
जिसको हर वक्त देखता हूं मैं
उसको बस एक बार देखा है।
तुझे प्यार करना नहीं आता,
मुझे प्यार के सिवा कुछ नहीं आता,
दो तरीके हैं दुनिया में जीने के,
एक तुझे नहीं आता एक मुझे नहीं आता।
कुछ न कुछ बोलते रहो हमसे
चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
अब पहुँची हो सड़क तुम गाँव
जब पूरा गाँव शहर जा चुका है ।
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मंजिल तो तेरी यही थी,बस जिंदगी गुजर गई आते आते
क्या मिला तुझे इस दुनिया से,अपनों ने ही जला दिया तुझे जाते जाते
कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें
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सोच को बदलो
सितारे बदल जायेंगे,
नजर को बदलो
नजारे बदल जाएंगे।
कश्तियां बदलने की
जरुरत नहीं मेरे दोस्त
दिशाओं को बदलो
किनारे बदल जायेंगे॥
----
आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और
चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था
और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....
यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है
और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की
सोच को बदलो
सितारे बदल जायेंगे,
नजर को बदलो
नजारे बदल जाएंगे।
कश्तियां बदलने की
जरुरत नहीं मेरे दोस्त
दिशाओं को बदलो
किनारे बदल जायेंगे॥
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आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और
चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था
और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....
यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है
और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की
जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”
दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!
भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई
और खाली जेब ने ' अपनो ' की.
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!
हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...
पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।
तू अपनी खूबियां ढूंढ
कमियां निकालने के लिए लोग हैं...
अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए लोग हैं...
सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
नीचा दिखाने के लिए लोग हैैं...
अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए लोग हैैं...
अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए लोग हैं...
प्यार करना है तो गोकू से कर,
दुश्मनी करने के लिए लोग हैं...
रहना है तो बच्चा बनकर रह,
समझदार बनाने के लिए लोग हैं...
भरोसा रखना है तो ख़ुद पर रख,
शक करने के लिए लोग हैैं...
तू बस सवार ले ख़ुद को,
आईना दिखाने के लिए लोग हैं...
ख़ुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए लोग हैं...
तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए लोग हैैं..
जो भी करना हैं तू आज कर
कल कहने के लिए लोग हैं.
------------
एक भीड़ सी है , इर्द गिर्द हमारे
एक तन्हाई सज रही, इर्द गिर्द हमारे।
------
एक एक कर के लोग निकल आए धूप में,
जलने लगे थे जैसे सभी घर की छाँव में l
-----
देखते हैं अब किस की जान जायेगी;
उसने मेरी और मैंने उसकी कसम खाई हैं!
..........
जो देखने में बहुत करीब हैं,
उन्हीं के बारे में सोचो, तो फासला निकले...
पहले तो पिलाते हैं, फिर सबसे बताते हैं,
इस शख्स से न मिलना, वो शख्स शराबी है।
हंगामा है क्यों बरपा...
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”
दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!
भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई
और खाली जेब ने ' अपनो ' की.
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!
हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.
ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...
पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।
तू अपनी खूबियां ढूंढ
कमियां निकालने के लिए लोग हैं...
अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए लोग हैं...
सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
नीचा दिखाने के लिए लोग हैैं...
अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए लोग हैैं...
अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए लोग हैं...
प्यार करना है तो गोकू से कर,
दुश्मनी करने के लिए लोग हैं...
रहना है तो बच्चा बनकर रह,
समझदार बनाने के लिए लोग हैं...
भरोसा रखना है तो ख़ुद पर रख,
शक करने के लिए लोग हैैं...
तू बस सवार ले ख़ुद को,
आईना दिखाने के लिए लोग हैं...
ख़ुद की अलग पहचान बना,
भीड़ में चलने के लिए लोग हैं...
तू कुछ करके दिखा दुनिया को,
तालियां बजाने के लिए लोग हैैं..
जो भी करना हैं तू आज कर
कल कहने के लिए लोग हैं.
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एक भीड़ सी है , इर्द गिर्द हमारे
एक तन्हाई सज रही, इर्द गिर्द हमारे।
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एक एक कर के लोग निकल आए धूप में,
जलने लगे थे जैसे सभी घर की छाँव में l
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देखते हैं अब किस की जान जायेगी;
उसने मेरी और मैंने उसकी कसम खाई हैं!
..........
जो देखने में बहुत करीब हैं,
उन्हीं के बारे में सोचो, तो फासला निकले...
पहले तो पिलाते हैं, फिर सबसे बताते हैं,
इस शख्स से न मिलना, वो शख्स शराबी है।
हंगामा है क्यों बरपा...
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