Monday, April 20, 2026

 Shayaris_ Internet _1

उसकी जगह कोई और होता तो मौत से डर जाता।
अगर बशर सुकरात ज़हर नहीं पीता तो मर जात

प्यार खूबसूरत चीज है
बस होना सही इंसान से चाहिए..!!

जब शौक के लिए वक्त ना मिले
तो समझ लेना कि जिंदगी शुरू हो गई है..!!

मौसम बहुत ठंडा है
चलो कुछ ख्वाहिशों को आग लगाते हैंl

सुख ही सुख दूंगी,
यह कह कर मुकर गई जिंदगी।

बर्बाद बस्तियों में किसे ढूंढते हो तुम
उजड़े हुए लोगों के ठिकाने नहीं होते।

लोग झगड़े में निवाले भी गिना देते हैं
तरबियत कैसी हुई है ये बता देते हैं
ऐसे लोगो से तो दूरी ही रहे तो बेहतर है
जो बुरे वक्त में औकात दिखा देते हैं.

मुझको मालूम है अपने सारे गुनाह,
एक तो मोहब्बत कर ली
दूसरी तुमसे कर ली,
तीसरी बेपनाह कर ली।

अब तो मुझे अपना बना कर रख लो
सबने मुझे मुझे तुम्हारा समझ कर छोड़ दिया।

दिल तू समझा कर बात
कि जिसे तू खोना नहीं चाहता
वो तेरा होना नहीं चाहता।

अमीरों ने गरीबों के लिए,
खुदा के अलावा कुछ नहीं छोड़ा।

अंधे निकालते हैं चेहरे से मेरे नुक्स,
बहरों को शिकायत है कि गलत बोलता हूं मैं।

ये जो अपने होते हैं,
ये अपने क्यों नहीं होते, यार।

तू समझा कर बात मेरी
सुनती तो मुझे दुनिया है।

हजारों ग़म हैं, खुलासा कौन करे।
मैं मुस्कुरा देता हूं, अब तमाशा कौन करे।।

जिंदगी तुझसे गिला नहीं कोई,
हमको हमसा मिला नहीं कोई।

इस शहर के अंदाज अजब देखे है यारों,
गूंगो से कहा जाता है बहरों को पुकारो....

जिदंगी तो सस्ती है,
बस रहने के तरीके महंगे हो गए।

निभाना ही तो मुश्किल है,
चाहना तो हर किसीको आता है।

हकीकी इसका वोही है
जो हद मे रह कर बेहद किया जाए।

आवाज काम तक आती है,
जबकि खामोशी आसमान तक जाती है।

कत्ल हुआ हमारा कुछ इस तरह किस्तों में,
कभी कातिल बदल गया, कभी खंजर बदल गया

नहीं हम में कोई अनबन नहीं है ,
बस इतना है कि अब वो मन नहीं है ,
मैं अपने आप को सुलझा रहा हूं ,
तुम्हे लेकर कोई उलझन नहीं है।

डूबा हुआ हूं जहर में पर पी नहीं रह,
मैं जिंदगी को सह रहा हूं पर जी नहीं रहा

अरे गैर क्यों ले जा रहे हैं मुझे अपने कंधों पर..
अरे हां मेरे अपने तो लगे हैं मेरा कब्र खोदने पर.

सबके दिलों में धड़कना जरूरी नहीं होता ,
लोगों की आंखों में खटकने का भी मजा अलग हैं

मेरे बाद अगर तुम मुझ जैसा किसी को पाओ,
तो मेरे बाद मुझ जैसे किसी के साथ ना करना।

मैं चुपके से टूट गया,
गिरता तो शोर होता।

बहुत करीब से अंजान बनके गुजरा है
वो जो कभी बहुत दूर से पहचान लिया करता था

किसी ने वक्त गुजारने के लिए दोस्त बनाया,
किसी ने दोस्त बनाकर वक्त गुजारा

हमें परिंदों सा नाजुक दिल देकर
दरिंदो की बस्ती में उतारा गया।

तुझे मैं दिल में रख तो लूं मगर पता है मुझे,
निकलना तूने भी एक रोज मेरी आस्तीन से है.

अगर ऊंचाई हासिल करना चाहते हो,
तो बाज बनो धोखेबाज नहीं..

No comments:

Post a Comment