Saturday, November 29, 2025

Two liners Shayaris

नैरंगी--सियासत--दौराँ तो देखिए

मंज़िल उन्हें मिली जो शरीक--सफ़र थे
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उनकी नज़रो में फर्क अब भी नहीं,
पहले मुड़ के देखते थे, अब देख के मुड़ जाते हैं।

कुछ देर की खामोशी है , फिर शोर आएगा,
तुहारा सिर्फ वक्त आया है, हमारा दौर आएगा
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दिल बहुत तकलीफ में है और
तकलीफ देने वाला दिल में हैं।

बहुत सारे थे मेरे अपने इस दुनिया मे,
फिर इश्क़ हुआ और हम लावारिश हो गए

तुमसे मिलना जरूरी नहीं,
तुम्हारा मिल जाना जरूरी है।

मेरी बेबसी तो देखो फराज
वो मुझसे रोया किसी और के लिए।

गरज ये नहीं की दीया तेरा हो या मेरा हो,
बुझाने बालो की खवाइश है, की बस अंधेरा हो।

नींद आएगी तो इस कदर सोएंगे
हमें जगाने के लिए लोग रोएंगे..!

तुझको पाने की तमन्ना में गुजारी होती।
एक जान और भी होती तो वो तुम्हारी होती।

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं।

बहुत देर लगी हमें ये समझने में।
कि बहुत फर्क है मोहब्बत कहने और करने में.

सवाल जहर का नहीं था, वो तो मैं पी गया!
मगर तकलीफ लोगों को तब हुई, जब मैं जी गया!

ये दुनिया सपेरों की बस्ती है, रिश्ते बनाकर डसती है.. यहाँ भरोसा बहुत मँहगा है, नफ़रत बिलकुल सस्ती है.

एक जनाजे के खातिर सारा जहां निकला
एक वो ना निकला जिसके खातिर जनाजा निकला.

मगस को बाग़ में जाने दीजो
कि नाहक़ ख़ून परवाने का होगा

ये जो पत्थर के हो चुके हैं,
अपने हिस्से का रो चुके

मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में
रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर
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जिनसे बातें खत्म ही नहीं होती थीं,
उनसे बात ही खत्म हो गई।
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हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है
हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है।
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में इसलिए भी जमाने में प्यारा हूं
मुझे पता है कहां कितना झूठ बोलना है।
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दूरी हुई तो उनसे, करीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे, जो बढ़ने से कम हुए।
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धोखा वफ़ा की राह में खाएं है हम ज़रूर,
लेकिन किसीके साथ में धोखा नहीं किया..


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