Two Liners
जो दुकान हमने दान कर दी थी
अब उसी से उधार लेते हैंकिस तरफ को चलती है अब हवा नहीं मालूम
हाथ उठा लिए सबने पर दुआ नहीं मालूम।
दूरी हुई तो उनसे करीब और हम हुए
ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
- Waseem Barelvi
जिसको हर वक्त देखता हूं मैं
उसको बस एक बार देखा है।
तुझे प्यार करना नहीं आता,
मुझे प्यार के सिवा कुछ नहीं आता,
दो तरीके हैं दुनिया में जीने के,
एक तुझे नहीं आता एक मुझे नहीं आता।
कुछ न कुछ बोलते रहो हमसे
चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
अब पहुँची हो सड़क तुम गाँव
जब पूरा गाँव शहर जा चुका है ।
महेश चंद्र पुनेठा
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मंजिल तो तेरी यही थी,बस जिंदगी गुजर गई आते आते
क्या मिला तुझे इस दुनिया से,अपनों ने ही जला दिया तुझे जाते जाते
कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें
The world admires the rejected ones, else the world will not be so colourful.
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सोच को बदलो
सितारे बदल जायेंगे,
नजर को बदलो
नजारे बदल जाएंगे।
कश्तियां बदलने की
जरुरत नहीं मेरे दोस्त
दिशाओं को बदलो
किनारे बदल जायेंगे॥
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आगे सफर था और पीछे हमसफर था..
रूकते तो सफर छूट जाता और
चलते तो हमसफर छूट जाता..
मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...
मुद्दत का सफर भी था
और बरसो का हमसफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....
यूँ समँझ लो,
प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!
वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है
और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....
अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......
लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।
बचपन में सबसे अधिक बार पूछा गया सवाल -
"बङे हो कर क्या बनना है ?"
जवाब अब मिला है, - "फिर से बच्चा बनना है.
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”
दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली...
बेशक, कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!
भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई
और खाली जेब ने ' अपनो ' की.
जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!
हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
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कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
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ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.
"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"
दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,
पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।
मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...
पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम
गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।
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तू अपनी खूबियां ढूंढ
कमियां निकालने के लिए लोग हैं...
अगर रखना ही है कदम तो आगे रख,
पीछे खींचने के लिए लोग हैं...
सपने देखने ही है तो ऊंचे देख,
नीचा दिखाने के लिए लोग हैैं...
अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का,
जलने के लिए लोग हैैं...
अगर बनानी है तो यादें बना,
बातें बनाने के लिए लोग हैं...
प्यार करना है तो गोकू से कर,
दुश्मनी करने के लिए लोग हैं...
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