Tuesday, December 9, 2025

 बर्फ़ीली हवाएं

 

सूनी राहें-

टूटी शाखें-

बिखरा घोंसला,

निहारती चिड़िया।

चली गयी,

सर्द हवा-

चीरती जंगलों को।

 

वीरान नहीं,

मंजर आगे,

बस्ती बंजारों की

बस रही अभी।

टिमटिमाते सितारे

सिहर रहे-बादलों की ओट।

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